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मेरे अल्फाज़

कविता... याद है मुझे

Dharamveer Verma

88 कविताएं

8 Views
भूला कहां हूँ अब तक
सांसे चलेंगीं तब तक
वो हर बात याद है मुझे
अब तक है दिल में ठहरी
वो मुलाकात याद है मुझे ।


ऋतु बदली,परिवेश बदला
सावन घिसटकर पतझार में बदला
देखते-देखते वक्त भी बदल गया
मेरे हालात का रंग भी बदल गया
तुम बदले तो तुम्हारे संग
तेरा घर,तेरा वो शहर भी बदल गया
वो मुलाकात, तुम्हारी सब बात
गली के नुक्कड़ की पहली मुलाकात
भूला कहां हूँ अब तक
वो ईंटों का शहर याद है मुझे ।


तुम्हारे हाथों की नर्माहट
तुम्हारी बातों की गर्माहट
दिलों को थामने वाली
वो ठिठुरन याद है मुझे
इक पल मे तोड दिया था नाता
भूला कहां हूं अब तक
वो तपन याद है मुझे।
..... धन्यवाद....
# आपके अल्फाज

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