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मेरे अल्फाज़

कविता... जब तुझको खोया था

Dharamveer Verma

87 कविताएं

19 Views
||||||| आपके अल्फाज||||

ओ मेरे साथी, तुझसे बिछडकर
जब मैंने तुझको खोया था
बडा नाजुक था वो पल
और बहुत रुआंसा भी
जिस्म चुप था,ये मन बहुत ही रोया था
ओ मेरे साथी.....

सब कुछ मिलता गया
वक्त के पल - पल बीत जाने में
बहुत कुछ खो दिया
इस वक्त के बिताने में
क्या खोया - क्या पाया
इसका कोई हिसाब ही न था
खोने का अहसास, तब हुआ
जब तेरा चेहरा मेरी आंखों ने खोया था
आंखें चुप थीं, ये दिल बहुत ही रोया था ।


हम चुपचाप सब्र करते गए
पर ये दिल कहां इतना सब्रदार रहा
ये जानता था,कि
इसने क्या खोया था
तभी तो बेसब्र हो
ये पागलों सा रोया था
ओ मेरे साथी....
......... धन्यवाद.....
# आपके अल्फाज

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