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मेरे अल्फाज़

आज भी...

Dhananjay Singh

38 कविताएं

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तन्हाइयों से दोस्ती यारी है आज भी
महफिल से दूर अपनी सवारी है आज भी
सारा नशा उतर सा गया प्यार का मगर
लगता है बाकी उसकी ख़ुमारी है आज भी

पहलू में याद तो हैं बहुत सी तेरी मगर
बैचेनियो का सिलसिला जारी है आज भी

रंगीनियों के दौर में अपना ये हाल है
मन अपना सादगी का पुजारी है आज भी
अपने इशारों पे जो चलाता है ये जहाँ
सबसे बड़ा तो वक्त मदारी है आज भी

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