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मेरे अल्फाज़

एकाकी

Dhananjay Singh

35 कविताएं

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खुशियां साझी हो सकती हैं
पर गम होता एकाकी
तन से साझा हो सकता है
पर मन होता एकाकी

हंसी सदा साझे में होती
और उदासी एकाकी
सुंदर सुखद कल्पना साझी
टूटे स्वप्न सदा एकाकी

धन-दौलत साझी हो सकती
पर सदा गऱीबी एकाकी
मुस्कान लवों की साझी होती
आँख के आँसू एकाकी

मिलन के हर पल साझे होते
विरह वेदना एकाकी
यश में सबका साझा होता
अपयश रहता एकाकी

सुखः के दिन साझे होते हैं
दुखः की घड़ियां एकाकी
भरा समुन्दर साझा होता
बूँद अकेली एकाकी

ज़ीवन के तार जुड़े हैं जब-तक
सब कुछ साझा हो सकता है
ज्योहीं टूटे तार सांस के
मौत ले चली एकाकी

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