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मेरे अल्फाज़

दफ़न किया था उसने

Dhadkan Patel

87 कविताएं

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फ़कत फ़रेब ही नहीं किया था उसने,
कभी दिल्लगी भी की थी उसने।

रहम दिल की है कहते हैं लोग उसको,पर
कल मुझ पर आँखो से वार किया था उसने।

किसकी महक है जो मिट्टी से आ रही है,
यहीं ओ है जिसनें तिरंगे को दफ़न किया था।

तुम्हारी हरकतें यूँ हमें बहका नहीं सकती,
यह माजरा हमने कल से ही जान लिया था।

मुखौटे लगाने से चेहरे ही बदल सकते हैं,
पर तुम्हारी आदतें कल से ही पहचान लिया था।

जिसने मुझे ईस जाल में लाकर छोड़ा है,
उसे याद नहीं, ईसका तोड़ ऊसी ने दिया था।

लम्बी-लम्बी बातें सब करते हैं, परंतु
जहर मीरा, शिव ने ही पिया था।

ये जो मेरे पक्ष में आज बोल रहा है,
कोई बताओ! ईसी ने मेरा खूँ किया था।

धड़कन पटेल


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