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Galtiyan

मेरे अल्फाज़

गलतियां

Devendra Soni

46 कविताएं

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जब से शुरू किया है मैंने
आत्ममंथन
पाया है, करता रहा हूँ मैं 
रोज ही
जाने- अनजाने
कोई न कोई गलतियां 

होता है जब पछतावा,
तो पाता हूँ 
अनजानी गलतियों के पीछे थी
मेरी ही लापरवाही और आलस्य।

जाता हूँ जब -
जान बूझकर की गलतियों की तह में
तो मिलता है, इसके पीछे -
कहीँ न कहीं मेरा ही राग - द्वेष!

समझाता हूँ फिर अपने मन को
जो हो गया सो हो गया
अब करना है इसमें सुधार।

तब पाता हूँ -
जरूरी है गलतियों से बचने के लिए
छोड़ दूँ अपना
आलस्य, लापरवाही और राग द्वेष
ताकि सही हो सके, वह उक्ति -
जब जागो तभी सबेरा।

कोई हल है क्या
अब इसके सिवाय ?

- देवेन्द्र सोनी, इटारसी।

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