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मेरे अल्फाज़

ज़िंदगी - जीवन

Devender Grover

16 कविताएं

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एक सांस तो ले तू,
तेरी इक सांस घट जायेगी,
कभी तानों में, तो कभी तारीफों में,
ये ज़िंदगी यूं ही कट जायेगी।

कभी ग़मों में तो कभी ख़ुशियों में,
कभी धूप में तो कभी छांव में,
कभी दुख में तो कभी सुख में,
ये ज़िंदगी है यारों अपने रंग तो दिखाएगी।

कितनी बार भी तू कर ले रफू,
अपनी इस ज़िंदगी की जेब के पन्ने,
निकल ही जायेंगे कुछ न कुछ,
इनमें से तेरी ख़ुशियों के लम्हें।।

जलाकर ख़ुद को तू रोशनी फैला,
ख़ुद पर हंसकर तू दूसरों को हंसा,
दूसरों के बदलने का छोड़, तू ख़ुद बदल जा,
ये ज़िंदगी है प्यारे, इसे हंस कर बिता।

दो पल की है इस ज़िंदगी की कहानी,
बचपन, जवानी, बुढ़ापा ओर फिर खत्म कहानी,
चलो हंस कर जी लें इस ज़िंदगी को, क्योंकि
ना आने वाली लौटकर, ज़िंदगी की फिर ये यह रात सुहानी।

कितनी दूर तुम्हें जाना है कुछ पता नहीं,
कितनी दूर तक ये ज़िंदगी चलेगी पता नहीं,
लेकिन कुछ ऐसा कर जाना है ज़िंदगी में,
तुम रहो ना रहो इस ज़िंदगी मैं, फिर भी तुम रहो।

क्योंकि

आज नया है तो वो कल पुराना होगा,
जीवन में लोगों का तो आना और जाना होगा,
यही इस मतवाली ज़िंदगी का एक सुन्दर तराना होगा,
जीवन में नाम रहे तेरा, तुझे कुछ तो ऐसा कर जाना होगा।


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