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मेरे अल्फाज़

जीवन धारा

Devender Grover

16 कविताएं

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जीवन है एक बहती धारा,
इसने तो बहते ही जाना है,
कल का दिन किसने देखा,
न जाने कब मृत्यु ने आना है।

जिन घड़ियों में हंस सकते हैं,
क्यों न लुत्फ़ उठाएं हम,
सुख-दु:ख तो है आना-जाना,
फिर क्यों संताप मनाएं हम।

हिम्मत कभी न हारें मन की,
अटूट विश्वास दिखाएं हम,
नज़र लक्ष्य पर अर्जुन सी रक्खें,
दृढ़ निश्चय लक्ष्य भेद जाएं हम।

जैसी सोच रखोगे मन में,
वैसा ही वापस पाएंगे,
सोच हमारी जब उज्वल होगी,
ईश्वर भी साथ निभायेंगे।

जीवन है एक बहती धारा,
इसने तो बहते ही जाना है,
सुख दुख दो किनारे इसके,
कर्मों ने ही पार लगाना है।

अंत तो एक दिन आना है,
फिर किस लिए घबराना है,
जब तक हम जीवित हैं,
लुत्फ़ इसका उठाना है।

जीवन की ये अंतहीन धारा,
मृत्यु तक बहती जाएगी,
शिव से निकली है ये धारा,
अंत शिव में ही समायेगी।

जीवन है एक बहती धारा,
ये तो बहती जायेगी,
सुख-दु:ख दो किनारे इसके,
कर्मों से ही पार लग जाएगी।

- देवेन्द्र ग्रोवर

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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