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मेरे अल्फाज़

जनसँख्या एक अपवाद

Devender Grover

16 कविताएं

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जनसँख्या का भूत है आया,
पर संसद में मौन है छाया।

पर हमने किससे है उम्मीद लगाई,
आखिर ये लोग अपने कौन हैं भाई।

भुखमरी और चोरों की भरमार है,
जो इसी जनसँख्या की पैदावार है।

जनसंख्या ये जो तेजी से बढ़ रही,
बहुत ही समस्याएं पैदा कर रही।

चारो ओर आबादी का प्रदूषण है
इस बीमारी पर न कोई नियंत्रण है।

खतरे में है वन्यजीवों की भी जान है,
पर अब तो लगता है,
जनसंख्या है तो मेरा देश महान है।

बेरोजगारी जो तेजी से बढ़ रही,
आर्थिक समस्याएं पैदा कर रही।

भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा
और जीना मुश्किल कर रहा।

इन समस्यायों से निजात पाना होगा,
जनसंख्या के बढ़ने पर अंकुश लगाना होगा

हमें कुछ तो कदम उठाना होगा
छोटा परिवार, सुखी परिवार का नारा लगाना होगा,

सोए कुछ नेताओं को जगाना होगा
संसद में जनसंख्या कंट्रोल बिल पास करवाना होगा।

सभी को इन्कम में प्रमोशन के नाम पर बुलवायेंगे,
पर उसकी जगह जनसंख्या कंट्रोल बिल पास करवायेंगे।

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