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मेरे अल्फाज़

बगिया का माली

Devender Grover

16 कविताएं

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आओ करवाते हैं परिचय हम,
इस बगिया के माली का।
जिन्होंने सींचा इस बगिया को,
महक रही जो हरी भरी।
इस बगिया का माली देता,
शब्दों के नन्हें पौधे और,
देता सुन्दर भावों की खाद।
उखाड़ फेंकता अनचाहे पौधों को,
और उनकी खरपतवार।
काट छांट के हर हर पौधे को,
रखता अपनी बगिया को सजा।
सबको सींचा उस माली ने,
सबको उसने प्रेम दिया।
हम जब भी इस बगिया में आते,
सब दुःख दर्द खुद छंट जाते,
समाँ कुछ ऐसा बंध जाता,
कि घंटों चुटकी में कट जाते।
धूप और छाँव का मेल है मैंने देखा,
इस माली के रूप में,
इस माली को देखा मैंने अपने पिता के रूप में।
🌹🌹 आप बहुत याद आते हो पापा 🌹🌹

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