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मेरे अल्फाज़

नसीहत

Deovrat Sharma

3 कविताएं

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मेरे क़रीब आ कर कुछ भी ना तू पाएगा।
ओर नज़दीक न आ वरना तो पछतायेगा

याँ कितनी मायूसी-ओ-निक़मतों का डेरा है।
तेरा साया भी ना ख़ुद तुझको बचा पायेगा

महज़ दीवानगी और लब पे तबस्सुम ले कर।
दर-ब-दर भटकेगा ना तू चैन से जी पायेगा

फिर ना शिकायत हो कि ना था समझाया।
हाथ से वक़्त फिसल गया फ़िर ना आयेगा

मेरे क़रीब आ कर कुछ भी ना तू पाएगा।
ओर नज़दीक न आ वरना तो पछतायेगा

@ deovarat- 08.04.2019
निक़मत=पीड़ा





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