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मेरे अल्फाज़

मुझे माफ़ कर दो

Deepak Narang

146 कविताएं

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वो जा रही थी बस मे, पढ़ रही कोई किताब खोल कर ।
दोहरा रही थी मन में, लेखक के कुछ सवाल बोलकर।

लेखक लिखे कि कैसे वो शायर बना।
इक लड़की के इन्कार में वक्त के हाथों कायर बना।

वो उसे छोड़ चली गई, वो ढूंढता रहा वीरानों में।
जब बेवफा की याद आए तो लिखता रहा अफसानों में।

वो भीगता रहा और कभी बह जाता दबे अरमानों में।
घुट घुट के जी रहा हर लम्हा, हालात के फरमानों में।

फिर उसके भीतर के दर्द ने कलम को आगाज दिया।
पाठकों की पसन्द ने उसको शायर कहकर नवाज दिया।

लेखक के लिखने से उसकी तन्हाईयां कम हो जाती है।
पढ़ते पढ़ते उस लड़की की आँखे नम हो जाती है।

बस रुकते ही वो उतरी और किताब वहीं छोड़ गई।
जिसकी लेखक को तलाश थी , वो जवाब वही छोड़ गई।

लेखक की जीवनी का कुछ असर उस पर दिखा था।
तभी किताब में "मुझे माफ़ कर दो", उसने उतरने से पहले लिखा था।

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