पानी तू कितने रंग दिखाता है

                
                                                             
                            पानी तू कितने रंग दिखाता है ,
                                                                     
                            
कभी थमा मदमस्त छलछलाता हुआ
शांति में घुल जाता है ,
तो कभी बहता हुआ बहार सा, बहार लाता है ,
कभी तू रुका जो जर-जर सा ,
चीख पुकार जीवन में सेंध लगाता है ,
कभी तू ठहरा भ्र्मर जाल बनाता है ,
तू गहराई का सत्य, बड़ी मासूमियत से छिपाता है ,
कभी गिरती हुई बूंद का हस्र सबक बन जाता है ,
रंग के जीवन में तू इस कदर रंग भर जाता है ,
वह तेरे पास आकर स्वयं को भूल जाता है ,
तेरे हृदय की अथाह गहराई न तू कभी दिखलाता है ,
जीवन की अद्भुत रचना का जब अहसास ना हो
तेरा उग्र स्वरूप आँखों की सत्यता दिखलाता है ,
कभी बच्चे के लिए तू खेल बन जाता है ,
तो कभी खेलते जीवन में बचपन सी नादानियां कर जाता है ,
खुश-खिलते जीवन में तू खेल रचाता है ,
कभी दो बूंद में लोगों की श्रद्धा बन जाता है ,
तो कभी दो बूंद की कीमत का अहसास न करा पाता है ,
बहता हुआ अनर्गल तू ही तेरा उपहास उड़ाता है ,
कभी गंगा सा पवित्र बन पवित्रता फैलाता है ,
पापी के पाप को खुद अपना उसे जीवन का अर्थ सिखाता है ,
कभी बहता हुआ निश्छल सा जीवन का छल दर्शाता है ,
गिरता हुआ झरने सा अपनी सांसों के मधुर स्वर से प्रकृति दिखलाता है ,
बदलते पात्रों के लेते हुए स्वरूप तू परिवर्तन दिखलाता है ,
इन स्वरूपों में तू तेरे हृदय की एक सी निष्पक्षता लाता है ,
तेरे हृदय की परछाई को ओढ़े जो नर ,
चलता तेरी लहरों के सरगम में
मोक्ष पार हो जाता है ,
पानी तू  कितने रंग दिखाता है 


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8 months ago
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