आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Pehla prem patr

मेरे अल्फाज़

पहला प्रेम पत्र

Deepak Kumar

9 कविताएं

70 Views
प्रिय ,
तुम्हारा पहला प्रेम पत्र आज भी सहेज रखा है ,
वैसे ही जेसै कोई सहेजता है अपनी धरोहर को ,
वैसे ही जैसे कोई मरता हुआ आदमी
सहेज रहा होता है अपनी साँसों को ।
हां ठीक वैसे ही ,
जैसे कोई विरह में तड़प रहा प्रेमी
सहज रहा होता है अपनी यादों को ।
मैंने भी वैसे ही सहेज रखा है ,तुम्हें और तुम्हारे प्रेम पत्र को ।
आज भी एक-एक लम्हों को जी रहा हूं
उसी पत्र के सहारे ,
जिसमें दर्ज है ,
तुम्हारी प्यार भरी बातें ,
वो नटखट शरारतें ,
वो शेरों-शायरी,
वो चुम्बन का निसान ,
जो मिटा नही है , न पत्र से और न मेरे होटों से ,
उसी लाल लिपिस्टिक का निसान
जो आज भी है,अंकित मेरे हदृय के पटल पर ।
जिसे छोड़ आई थी तुम वर्षो पहले ।

तुम्हारी साँसों की खुशबू ,
आज भी महक रही है ,
उन यादों के सहारे ,
जो चंद हसीन पल ,
कभी बिताए थे तुम्हारे साथ ,
प्रिय , आज भी सहज रखा है ,
ठीक वैसे ही जैसे कोई सहेजता है , अपने प्रथम शिशु को ......................

दीपक कुमार

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!