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ab nahin koee krshn aane vaale hai

मेरे अल्फाज़

अब नहीं कोई कृष्ण आने वाले है

Deepak Kumar

5 कविताएं

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अब नही कोई कृष्ण आने वाले है 
लुटती अस्मिता को न बचाने वाले है 
घर ,घर में ही घूम रहे है दुःशाषन 
अब किस-किस से बचाने वाले है 
अब नही कोई कृष्ण आने वाले है 

तार-तार हो रही है शीलता 
जन्म ले रही है अश्लीलता 
ख़त्म होती जा रही है मानवता 
हावी है हवस , इंसानियत पर
दम तोड़ रही है मानवता 

अब नही कोई कृष्ण आने वाले है 
पापियों को सबक सिखाने वाले है
अब तुम्हें स्वयं ही चंडी बनना होगा 
अपने त्रिशूल से
अपराधियों का अंत करना होगा 

न शासन है, न प्रशासन है 
न ईमान है, न ज़मीर है 
यह अंधा युग है गौरी,
यहाँ असुरों का राज है 
इस राज का अंत करना होगा
तुम्हें एक बार फिर
'दुर्गा','काली,'चण्डिका' बनना होगा 

अब नही कोई कृष्ण आने वाले है 
फूल सी नाज़ुक बच्ची को बचाने वाले है 
ना, संसार से पाप मिटाने वाले है 
ना, धर्म की स्थापना के लिए जन्म लेने वाले है 
अब नही कोई कृष्ण आने वाले है 

- दीपक कुमार

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