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Heart Burns

मेरे अल्फाज़

दिल जलता है

Deepak Bharti

9 कविताएं

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तन्हाइयों के आंचल में
मेरा दिन ढलता है

जब मूंदता हूं आंखें अपनी
तब मेरी इन पलकों तले
तेरा ही ख़्वाब पलता है

ना फेरना नज़रें कभी
ना मोड़ना ये राहें अपनी

कभी मिले साथ तुम्हारा भी
बस इसी उम्मीद में,
आशा का एक दीप जलता है

जब देखता हूं तुम्हें कभी,
किसी और के साथ
कसम से, दिल जलता है

ये दीपक तो मुसाफ़िर है
भटकती हुई इन राहों का

चले तू जिस भी राह
ये तेरी राह चलता है

मोड़कर यूं राह अपनी,
ना फेरना नज़रें कभी
कसम से, दिल जलता है

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