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मेरे अल्फाज़

कदम

Deepa Gupta

34 कविताएं

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कदम साधकर रखना बच्चों
मार्ग कठिन दूर है मंजिल
कष्टों भरी डगर है जीवन
गिरकर उठना भी है मुश्किल
आंधी तूफ़ां बिजली ओला
रोकें रस्ता सर्द हवाएं
रुकना मत तुम चलते रहना
बाधाएं कितनी भी आएं
काम क्रोध मद लोभ मोह भी
भटकाते हैं हमको हरदम
जो न फंसते चाल में इनकी
कट जाते हैं उनके बन्धन
जल में जो भी रहें कमल बन
पाएं वे ही आदर जग में
सपने सच हों उनके सारे
जो भी सोचें वे हर पल में
मात पिता के वही लाड़ले
सुख सौभाग्य पा जाते हैं
इनसे जो भी करें किनारा
वही अभागे रह जाते हैं।

- दीपा संजय

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