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Bijli

मेरे अल्फाज़

बिजली

Deepa Gupta

34 कविताएं

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मैं हूँ बिजली चमका करती
हर आंगन में दमका करती
घर में मैं ही साथ तुम्हारे
ऑफिस बैठक और गलियारे
एक्वागार्ड क्या हो ओवन
प्रेस मुझी से करती धोबन
बल्व ट्यूब कूलर या पंखा
जहां भी देखो मेरा डंका
पानी गर्म है मुझसे मिलता
चटनी मसाला मुझसे पिसता
मेरी तेजी सभी ने देखी
पल में जान हूँ मैं ले लेती
नँगे पावं ना मुझको छूना
माफ़ करूँ मैं तुम्हें कभी ना
पूजा घर क्या दादी जी का
फ्रिज किचिन में क्या मम्मी का
कम्प्यूटर है तुमको भाता
बिन मेरे ना तुम्हे सुहाता
पिक्चर आज टीवी पे देखी
और टीवी चलता मुझसे ही
जल से मिलता मुझको जीवन
मुझसे चलते सारे उद्यम

- दीपा संजय

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