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मेरे अल्फाज़

भूख

Deepa Gupta

249 कविताएं

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क्यों भूख ने इंसान को मज़बूर कर दिया,
इन्सानियत का आज क्यों खून कर दिया।

हुए रिश्ते तार-तार बनी कारण आज भूख,
हैवानियत का ऐसा नँगा नाच कर दिया।

जो थी किसी माँ के आँखों का कभी नूर,
कोठे पे बिठा उसे  जिंदा लाश कर दिया।

सपने पिता ने देखे जिस औलाद के लिए,
उस औलाद ने ही पिता का अपमान कर दिया।

नोट, वोट, पैसा, रोटी सभी सबब भूख के,
इन सभी ने इंसान को बदनाम कर दिया।

जो था कभी दबंग आज भर रहा पानी,
खेल जिंदगी का  भूख ने तमाम कर दिया।

पासा पलट के रख दिया इस भूख ने है आज,
मरे हुए को जिंदा कागज में  कर दिया।

इस भूख का गोया अब असर तो देखिए,
एक प्यार भरे दिल को सुलेमान कर दिया।

✍🏻नाम-दीपासंजय*दीप*
बरेली
(स्वरचित)

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