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मेरे अल्फाज़

जरूरत कोई समझता नहीं देश के

Darshan Sharma

9 कविताएं

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देखो आज होड़ लगी है देश में
एक दूसरे को हराने की,
जरूरत कोई समझता नहीं देश के
हालात समझ पाने की,

किसको कैसे हराना है और
किसको कैसे गिरना है,
जैसे तैसे गठबंधन करके बस
अब सत्ता को पाना है,
आ गयी फिर बारी वो झूठे अब
वादे हमें गिनाने की,
जरूरत कोई समझता नहीं....

बस दो भाइयों में दंगा करवाओ
एक नफरत की आग लगाओ,
जाति - धर्म के नाम पर अपने ही
देश के अब टुकड़े करवाओ,
नीति यही फिर बनेगी देखना
वोट यहाँ पर पाने की।।
जरूरत कोई समझता नहीं....

- दर्शन शर्मा

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