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मेरे अल्फाज़

पतझड़ जिंदगी का

Daisy Ram

3 कविताएं

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सूखे पत्तों की तरह
पतझड़ के हो चले
जिंदगी की किताब के पन्ने
खुद ब खुद पलटने लगे
हुई शाम तो
अंधेरों से डरने लगे
चिराग जला इक कोने में
सुबह का इंतजार करने लगे
दर्द बहुत हैं सीने में, पर
अश्कों को पीने लगे
जिंदगी थमने लगी तो
साँसों को गिनने लगे

डेजी राम

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