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मेरे अल्फाज़

अपना घर

Choudhary Tarique

3 कविताएं

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वही आँगन वही खिड़की वही दर याद आता है,
मैं जब भी तन्हा होता हूँ मुझे घर याद आता है,
मेरे सीने की हिचकी मुझे खुलकर बताती है,
कि तेरे अपनों को गाँव में तू अक्सर याद आता है ।

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