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Just Your Face is Everywhere

मेरे अल्फाज़

बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है

chitranghda pal

14 कविताएं

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पेड़ों की ये ठंडी हवा जब मुझे छू जाती है,
ऐसा लगता है मां तू अपने हाथों से सहलाती है।

सूरज की पहली किरन जब प्यार से जगती है,
उस वक़्त माँ बस तेरी ही याद आती है ।

रात को चन्द्रमां जब लोरी गा के सुलाता है,
सितारों से भरा आकाश तेरा आंचल बन जाता है।

जिस आंचल में ना कोई दर ना कोई भय सताता है,
सच कहू माँ हर जगह बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है,
बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है।

- चित्रांगदा पाल

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