आपका शहर Close
Kavya Kavya
Hindi News ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Just Your Face is Everywhere
Just Your Face is Everywhere

मेरे अल्फाज़

बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है

chitranghda pal

14 कविताएं

60 Views
पेड़ों की ये ठंडी हवा जब मुझे छू जाती है,
ऐसा लगता है मां तू अपने हाथों से सहलाती है।

सूरज की पहली किरन जब प्यार से जगती है,
उस वक़्त माँ बस तेरी ही याद आती है ।

रात को चन्द्रमां जब लोरी गा के सुलाता है,
सितारों से भरा आकाश तेरा आंचल बन जाता है।

जिस आंचल में ना कोई दर ना कोई भय सताता है,
सच कहू माँ हर जगह बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है,
बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है।

- चित्रांगदा पाल

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Other Properties:

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!