आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Just Your Face is Everywhere
Just Your Face is Everywhere

मेरे अल्फाज़

बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है

chitranghda pal

14 कविताएं

34 Views
पेड़ों की ये ठंडी हवा जब मुझे छू जाती है,
ऐसा लगता है मां तू अपने हाथों से सहलाती है।

सूरज की पहली किरन जब प्यार से जगती है,
उस वक़्त माँ बस तेरी ही याद आती है ।

रात को चन्द्रमां जब लोरी गा के सुलाता है,
सितारों से भरा आकाश तेरा आंचल बन जाता है।

जिस आंचल में ना कोई दर ना कोई भय सताता है,
सच कहू माँ हर जगह बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है,
बस तेरा ही चेहरा नज़र आता है।

- चित्रांगदा पाल

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
Comments
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!