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मेरे अल्फाज़

तुम माली बन जाओ ना

chandraprabha nirala

1 कविता

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सुंदर सुंदर बगिया की तुम माली बन जाओ ना
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

पेड़ फूल पत्ते इन सबकी भी अब वाणी तुम सुन आओ ना
और स्वच्छ भारत की गीत इन्हें भी सुना आओ ना
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

राष्ट्र (संसार) हित कुछ पेड़ हम लगायें, कुछ तुम भी सहयोग जताओ ना
जग को नष्ट होने से बचाने की खातिर,कुछ संकल्प तुम भी अपनाओ ना
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

काट-काट कर पेड़ जीविका की खातिर, ऐसे कर्म से तुम बच जाओ ना
बचाने के लिए मानव समेत सबका अस्तित्व, आज एक-एक पेड़ लगा जाओ ना
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

फूलों की खुशबू तन मन को देती विलक्षण शांति
इसका आभास अब तुम भी कर जाओ ना
नहीं पहुंचाती किसी भी हाल में यह हानि इसका मूल्य तुम जान जाओ ना 
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

हर पल साथ निभाती है यह, अनोखा राज इसका तुम अब जान जाओ ना
वादा किये हो खुद से,पेड़ अब लगाओगे, अब इसका पालन तुम कर जाओ ना
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

सुंदर-सुंदर बगिया की तुम माली बन जाओ ना
मत काटना इन पेड़ों को इसकी रक्षक तुम बन जाओ ना

- चंद्रप्रभा निराला

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