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Toofan

मेरे अल्फाज़

तूफान

Chandan Kumar

43 कविताएं

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पहचानता हूं उस दिन- रात को 
पहचानता हूं उस डरावने मौसम को
पहचानता हूँ उस आंधी -तूफान को 
जिसने उजाड़ दिया गांव -घर मेरा 

घर बना था कल जिसका
बीमार पड़ी थी मैं जिसकी
उड़ा ले गया सब कुछ 

गया भीतर जिसके डर से
वह ले गया उड़ाकर छप्पर
भीग गया सब मिलकर
चौखट गिरा सर पर मरी वह
ग्यारह दिन पहले जिसकी मांग सजी थी 

क्रूर तूफान ने
तांडव की नाच दिखाई
बड़े बड़ों का
घर दरवाजा तोड़ दिखाया,
विशाल वृक्षों का अहम गिराया
घर में दाने दाने को तरसाया,
क्यों ईश्वर ने
ऐसा तूफान बरसाया ?

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