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मेरे अल्फाज़

कोरोना हारेगा-हिंदुस्तान जीतेगा

CHANDAN KUMAR

12 कविताएं

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कोविड-१९ महामारी काल को टाल रहे हो |
अपनी जान को जोखिम में तुम डाल रहे हो |
तुम्हारे अथक प्रयास हीं राष्ट्र उबारेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

प्राणघाती विषाणु को निशाचर मान रहे हो |
है अदृश्य शत्रु ये तुम जान रहे हो |
तेरा साहसिक कृत्य इसे पछाड़ेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

जीवों से जीवंत है यह, रहस्य बखान रहे हो |
इसकी दुर्बलता को भी पहचान रहे हो |
यह ज्ञान प्रकाश जो तू आज बिखेरेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

सब सो रहे घरों में हैं, तुम जाग रहे हो |
समस्त सुखों को वतन वास्ते त्याग रहे हो |
तेरा यह परित्याग वतन निखारेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

उपचार नहीं पर रफ्तार संक्रमण थाम रहे हो |
सामाजिक दूरियों से अब तक, करते जो इसे नाकाम
कर रहे हो तालाबंदी ही सामुदायिक प्रसार कड़ी मिटायेगा
| जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

अविराम शोध से जीवन-मौत का सिक्का जो उछाल
रहे हो | आद्यतन लाचारी का तोड़ निकाल रहे हो |
हाँ अगर इस विपदा पर आज विचारेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

पत्थर खाकर भी वतन संभाल रहे हो |
अंग-भंग होकर भी, हृदयगत राष्ट्रभक्ति को पाल रहे
हो | तेरा हर बलिदान मातृभूमि को तारेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

निम्न रोग-प्रतिरोधी क्षमता पर इसका प्रहार रहा है |
साहस और संयम से हीं यह हार रहा है |
विश्वास कोरोना प्रयुत्सुओं का, विनाश को टालेगा |
जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

ऐ गुदड़ी के लालों जो तू कमर कस तैयार रहा है |
मदद करो हमे भारत ! विश्व गुहार रहा है |
जय कर्मरवीर तू मुकाम दंभ से पा लेगा |
हाँ जीतेगा हिंदुस्तान कोरोना हारेगा |

-  चंदन कुमार, आत्मज वेद प्रकाश शर्मा,
छोटी कोपा, नौबतपुर, पटना (बिहार)
पिन कोड:- 801109

ईमेल[email protected]

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