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मेरे अल्फाज़

ईलाज और गरीबी

Chandan Kumar

55 कविताएं

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हमारे शहर में ,बड़े-बड़े अस्पताल हैं,
जाकर जिसमें ,कुछ रोगी मरना चाहते हैं
अपना सपना ,पूरा करना चाहते हैं

नाज़ुक रोगी से ,फीस वह जादा लेता है 
इलाज करता ऐसा ,आभाव में गरीब मर जाता है
जिन्दा बचा तो, अमीरों के कर्जदार हो जाता है,

वो ढूँढता है निवाला उखड़े हुए खेतों में
हे ! भगवान ,सब संवेदनाशून्य हो रहा है
जिसके बल पर ,भरता है अन्न से पेट तुम्हारा
क्या वह इलाज भी नहीं करवायेगा ?

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