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मेरे अल्फाज़

गाता जाता बेरोज़गार, मजदूर

Chandan Kumar

55 कविताएं

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मजदूर हूँ ,बेरोजगार हूँ ,
यहाँ काम नहीं मिलता है
अपने परिवार सहित
बाहर चलता हूँ ,
जैसे पढ़े लिखे विदेश
मैं अपने देश चलता हूँ,।

एक सवाल छोड़कर चलता हूँ,
मेरे दिलो दिमाग को,
आखिर कौन कुचलता है ?
जो मैं अपनी मतृभूमी,छोड़ चलता हूँ ?

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