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 aatmraksha ka aalap

मेरे अल्फाज़

आत्मरक्षा का आलाप

Chandan Kumar

45 कविताएं

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सखी सहेली कार्यक्रम में
सुना मैंने खुशबू की तान
उसकी बातो में थी बड़ी जान

झगड़ कर पिता से
बेटे की बराबरी करने लगी
पटना के छात्रालय में रहने लगी

जो सोच न सका, माता-पिता
वह खुशबू में था ज्ञान,

वह कभी न छोड़ेगी अपनी
तीन गॉल्डेन्स चान्स,

पहले वह पढार्इ पूरी करेगी
फिर करेगी नौकरी
जीवन-साथी खुद चुनेगी,

कदम-से कदम मिलाकर
बाँटेगी लडकियों में ज्ञान,
घुम-घूमकर विश्व में
खोलेगी अनाथालय और शिक्षा धाम

बाराबरी ही नहीं,
विश्व में
लड़के से आगे बढाएगी
लड़की की शान,

वह गर्भ में नहीं मरेगी
संसार पर शासन करेगी
और करेगी विश्व का कल्या।

चन्दन कुमार विश्वास

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