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मेरे अल्फाज़

ठीक नहीं

Brijpal Singh

15 कविताएं

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अब उसको वो भूली बातें याद दिलाना ठीक नहीं हैं
नाहक वो आसुर्दा होगा! उसको रुलाना ठीक नहीं हैं
फोन के आगे मैं चुप बैठा,, मैं कितनी देर से सोच रहा हूँ
अभी वो थक कर सोया होगा,, उसे जगाना ठीक नहीं है
इक रौशन खिड़की कहती हैं,, देखो आगे दरिया है
जाग रहे है सब घर वाले,, लाॅन में आना ठीक नहीं है
जितना सफर गुजरा है अबतक,, अब इसकी तकमील करो
तुम अपने घर,, मैं अपने घर,, अब आगे जाना ठीक नहीं है
घर वाले नाराज तो होंगे इतनी देर से आने पर
चांद के साथ सफर पे थे तो,, ये बहाना ठीक नहीं है

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