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मेरे अल्फाज़

नब्ज़ छूकर कोई तो दवा कीजिए

Brijesh Bhargava

2 कविताएं

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मेरे मासूम दिल पर दया कीजिए
इश्क़ की इल्तिजा है वफ़ा कीजिए

दर्द हद से गुजरता चला जा रहा
नब्ज़ छूकर कोई तो दवा कीजिए

माफ़ गुस्ताखियां यूं ही होती नहीं
कुछ न कुछ तो मुकर्रर सज़ा कीजिए

है मयस्सर किसे जिंदगी में सुकूं
ग़र मिले पल तो खुलकर जिया कीजिए

जिंदगी को अकेले जिया जाय क्यों
साथ मेरे भी कुछ पल रहा कीजिए

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