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मेरे अल्फाज़

बस कुछ पलों की मोहलत दे दो

BLACK&WHITE FEELINGS

3 कविताएं

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बस कुछ पलों की मोहलत दे दो

बस कुछ पलों की मोहलत दे दो ,
अब इतना समय तो लगेगा
अपना जिस्म जलाना पड़ेगा मुझे
अपनी रूह को मिटाना पड़ेगा

दफ़नाना पड़ेगा हर जज़्बात मुझे,
जलाना पड़ेगा हर वो लम्हात मुझे
तेरी क़ुरबत का जो तलबगार है,
जिसे बस तेरे आने का इंतज़ार है

तेरी यादों से जुड़ा हर एक धागा
तोड़ना पड़ेगा,
जो तुझ तक पहुँचता है वो रास्ता भी
छोड़ना पड़ेगा
तोड़नी पड़ेगी उम्मीद की वो काँपती
हुई शाख़ मुझे,
बुझानी पड़ेगी आरज़ूओं की अध-
जली राख़ मुझे
अपने कुछ ख़्वाबों का भी मुझे अब
क़त्ल करना होगा,
जो तमन्ना है तुझे अपना बनाने की ,अब
उसे भी मरना होगा

बस कुछ पलों की मोहलत दे दो ,
अपनी मोहब्बत को उम्र भर के लिए सुला दूँगा मैं
बस पूरी ज़िंदगी लगेगी मेरी ,
फ़िर, आपनी रूह के मिटते ही तुझे भुला दूँगा मैं

-प्रणव सन्तवन





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