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मेरे अल्फाज़

गणतंत्र दिवस

Bipin Kumar

40 कविताएं

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26 जनवरी के पावन दिन पर यह संकल्प उठाते हैं,
तन-मन-धन से साथ देकर नया भारत बनाते हैं।

सुंदर सा सपनों का भारत दिल में आज बसाते हैं,
सब मिलजुल कर सुकर्मों से इतिहास नया बनाते हैं।

बहुत हो गया आंख-मिचोली आंख से आंख मिलाते हैं,
कितने दुश्मन को तो घायल आंखों से कर जाते हैं।

लहू देश के वीरों का है कण-कण में समाया,
यहां का हर पत्थर है देखो एक इतिहास बनाया।

कमी कहां थी जिसके खातिर ऐसा कदम उठाया,
गिरवी रख कर रूह को अपनी दुश्मन संग बैठाया ।

मां का आंचल कायर के करतूतों से शर्मिंदा,
हक नहीं ऐसे लोगों को, रहने को अब जिंदा।

चुप न बैठो, ढूंढ निकालो और छुपे हैं कितने,
देर हुई तो मुश्किल होगा गद्दारों को ढूंढने में ।

नजर जो टेढ़ी किया किसी ने, यह न समझो नजर उतारेंगे,
पलक झपकते ही दुश्मन को पल में मार गिराएंगे ।

सड़क, सुरक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा और हो बिजली पानी,
हर नागरिक को मिले यह सुविधा बने नहीं कोई कहानी ।

वो कौन थे, जो बेचैन रहे अपनों के चैन के खातिर,
डरे नहीं वो, झुके नहीं वो, चढ़ गए हंसकर फांसी ।

ज्ञान का दीप जलाकर चलो ज्योतिपुंज बनाएं,
धरती के कोने-कोने से अंधेरा दूर भगाएं।

जिन वीरों ने कुर्बानी देकर वतन आजाद कराया,
उनको नमन करने के खातिर अपना शीश झुकाएं।


बिपिन कुमार

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