आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Bujurg Mata Pita

मेरे अल्फाज़

बुजुर्ग माता-पिता

Bipin Kumar

40 कविताएं

28 Views
यादों में बसा कर आपको याद करते हैं,
सदा सलामत रहें यह रब से फरियाद करते हैं ।

पाकर प्यार आपका ही संवरने लगे हैं,
आपकी यादों के साए में ही रहने लगे हैं ।

मिल जाता है सुकून बेचैन दिल को पल में,
जब भी जुबां पर दिल से आपका नाम लेते हैं।

वह भी क्या वक्त था, जब हर पल साथ रहते थे,
जरा सा चोट लग जाए तो उनके दम निकलते थे।

अपना ही पेट जब जी का जंजाल हो गया,
आज चाह कर भी मिलना मुहाल हो गया ।

न जाने समय हमें किस मोड़ पर ले आया,
बड़े खुशनसीब हैं वो, जिस पर है मां-बाप का साया ।

जिनके डांट में भी प्यार की अजब गहराई है,
उम्र के पड़ाव में आकर यह बात समझ में आई है।

लुटा बैठे हैं जो सब कुछ अपनों के खातिर,
इसी अपनत्व के रिश्ते को हम भुला बैठे हैं।

बड़ी उम्मीद होती है जब जर्जर शरीर हो जाए,
कोई तो हो जो मुश्किल में हमारा साथ निभाए ।

बची है आशाओं की डोर, जिसे तुम तोड़ मत देना,
निगाहें दर पर रहती है, मुंह अपना मोड़ मत लेना ।

बची है चंद सांसे ही, भला मैं छोड़ दूं कैसे,
बिना देखे तुम्हें जी भर, ये रिश्ता तोड़ दूं कैसे।

करो न, देर तुम इतना बहुत ही देर हो जाए,
तुम मुझसे मिलने आओ और हम मिल ही न पाएं।

सादर समर्पित
बिपिन कुमार

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!