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मेरे अल्फाज़

सैलाब

Bindeshwar Prasad

27 कविताएं

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हर इक शितम सैलाब से क्या कम है
एक आवाज़ इंकलाब से क्या कम है।
चोरी डकैती बेईमानी अपहरण आम है
यहाँ बलात्कार अजाब से क्या कम है।

अजाब-दुख

बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

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