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मेरे अल्फाज़

जलवा मुहब्बत का

Bindeshwar Prasad

27 कविताएं

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किसी का मन भटकता है,किसी का दिल मचलता है
ये सब रब ही जाने, कब कैसा वक्त गुजरता है ।

कोई जल्दी समझ जाता, किसी को देर है लगती
कोई उलझन में रहता है, किसी को टेर नहीं लगती।

किसी की किस्मत है फूटी,किसी का दिल है टूटा
इसे अब कौन समझेगा , मुकद्दर कैसे है रूठा।

कहीं जलवा मुहब्बत का, कहीं तकरार है दिल में
कहीं इकरार जिगर में तो, कहीं इनकार है दिल में।

कहीं रिश्ते नये बनते, कहीं ये खार पुराने हैं
दुनिया ऐसे चलती है, यहां किरदार इतने हैं।

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