हवाएं पैगाम लायी हैं

                
                                                             
                            हवाएं पैगाम लायी हैं !
                                                                     
                            
हिंसात्मक आँधियों से टूटे घर बनाने आयी हैं
हवाएं पैग़ाम लायी हैं

खिलखिलातीं विलक्षणताओं में अँधेरा क्यों छा गया
कभी ना ग्रस्त होने वाला भाईचारा समुद्र में समा गया
आवाम के नुमाइंदों को समझाने आयी हैं
हवाएं पैगाम लायी हैं !

अनसुलझी पहेलियाँ तो बहुत हैं
स्थापित किये जाने वाले मुकाम बहुत हैं
बनावटी चेहरों पर खुशनुमा मुस्कान बहुत है
मासूमों की किलकारियां जन्नत के द्वार लायी हैं
हवाएं पैगाम लायी हैं !

नकारात्मकता की नुमाइशों का बोलबाला जगह जगह
भाई बंधुओं में खून का सैलाबी खेल, जगह जगह
पत्रकारिता में अर्ध सत्य को सत्य बनाने की खिताबी जंग, जगह जगह
प्रचार प्रसार में धुत्त वज़ीर-ए-आज़मो को जगाने आयी हैं
हवाएं पैगाम लायी हैं !

आखरी मौका है प्यार मोहब्बत को सम्भालो यारों
अल्लाह राम गुसाईं है, हाथ से फिसलती हुई रेत, सम्भालो यारों
क्या पढेंगी नस्लें इतिहास, नस्लें सम्भालो यारों
इबादत-ए-सद्भावना हो दोबारा, ये उपहार लायी हैं
हवाएं पैगाम लायी हैं !

- बिक्रम चत्तोवाल...
9873587510


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
8 months ago
Comments
X