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मेरे अल्फाज़

तुम भी जग जाओ...

Bijay Bahadur

413 कविताएं

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बीते कल की, गई कालिमा
नवप्रभात की छाई लालिमा
देखो हो गई भोर, तुम भी जग जाओ
फैला ओज चहुंओर,अब तो जग जाओ॥

भास्कर आए तेरे द्वार
संग उज्ज्वलता रहे पुकार
हे उद्विकास के सूर्य, तुम भी जग जाओ
आई धवलता की तूर्य,अब तो जग जाओ॥

क्यूँ खयाली सपने में खोये हो
बीती निशा, नींद में सोये हो
जो थके, देखते तेरी ओर, तुम भी जग जाओ
हो राष्ट्र उन्नति के डोर, अब तो जग जाओ।।

पंछी काम आज का बांट रहे
जो पिछड़ गया उसे डांट रहे
किस दिशा जायें, लगा रहे ज़ोर, तुम भी जग जाओ
आशाओं का हुआ अंजोर, अब तो जग जाओ।।

मस्जिदों से आने लगी अजान
सोये क्यूं तुम बन अनजान
मंदिर -घंट का शुरू शोर, तुम भी जग जाओ
है प्रगति को देने ज़ोर,अब तो जग जाओ।।

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