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मेरे अल्फाज़

सपनों से नहीं जाती ये जिंदगी गुजारी

Bijay Bahadur

404 कविताएं

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आगत के लिए करनी होती, हर पल है तैयारी।
केवल सपनों से नहीं जाती, ये जिंदगी गुजारी।

निज त्रुटि नही दिखती, जो करते दोषारोपण।
कुछ सीख नहीं पाते,होता दुर्भाग्य का आरोहण।।
कहलाते हैं बुजदिल, मति उनकी जाती मारी।
केवल सपनों से नहीं जाती, ये जिंदगी गुजारी।

हर व्यक्ति से जुड़ी है, आश्रितों की भावनाएं।
हक उसे नहीं, केवल निजता अपनाए।।
हर अपनों के लिए जिए, उसकी है जिम्मेदारी।
केवल सपनों से नहीं जाती, ये जिंदगी गुजारी।

बिजय बहादुर तिवारी धूल
सर्वाधिकार सुरक्षित


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