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मेरे अल्फाज़

मतदाता दिवस

Bijay Bahadur

460 कविताएं

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जनवरी माह पचीसवीं तिथि
रहे सजग जनतंत्र वीथी
प्रजातंत्र-पहल से कोई न रूठे
मतदाता न  कोई पीछे छूटे
समावेशी गुणात्मक भागीदारी
निश्चितता, पारदर्शिता, पहरेदारी
जागरूक रहे हर मतदाता
मतदाता दिवस मनाया जाता।

विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र
महतम लिखित संवैधानिक गणतंत्र
होना नागरिक मतदाता
अद्भुत गौरव अनुभूति दाता
वोट से बदलती यहां सरकार
हम मतदाता हैं पहरेदार
ई वी एम द्वारा देकर वोट
भ्रष्ट अहमी को देते चोट।

जागरूक हमें भी है रहना
मिथ्या प्रतीति में नहीं बहना
लालच दलदल में नहीं धंसे
जाति जकड़न में नहीं फंसे
आओ मिलकर कसम खांएँ
करने मतदान जरूर जाएं
हम चनावी -साहिल न उबें
प्रजातंत्र की नैया न डूबे।

- बिजय बहादुर तिवारी
सर्वाधिकार सुरक्षित

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