आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   asalee praanhantaa tum praanpriye

मेरे अल्फाज़

असली प्राणहंता तुम प्राण प्रिये

Bijay Bahadur

413 कविताएं

40 Views
आराधना हमेशा प्रभु से करूँ मैं।
जब भी जन्म लूँ तुम्हीं को वरूं मैं ॥
तुम्हीं से अपने मैं सपने संवारूँ।
अन्यथा कंवारा ही जीवन गुज़ारूँ॥
जब भी बने मेरी जीवन कहानी।
हरदम बनो मेरे रातों की रानी ॥
सेहरा मैं पहनूँ सहर के लिए।
राही तेरे रहबर के लिए॥
अपलक मैं रहूँ झलक तक तेरी ।
बस तेरा बनूँ ये सनक है मेरी ॥
शैल शीला सम मूक क्यूं बनी।
प्रतीक्षा मे तेरे ऐ प्रतिप्रदर्शनी।
मदमस्त मदन मदहाल हुआ।
व्याकुल बेसुध बेहाल हुआ॥
आई लिए मृग- नयनों के बाण।
जैसे चली तलवारे कृपाण।
हुआ घायल गिरा गली में तेरी ।
दरश दो देवी, अब करो ना देरी ॥
है साँसें रुकीं करम के लिए ।
यम बेबस बेवफा सनम के लिये ॥
असली प्राणहंता तुम प्राण प्रिये।
प्यार हमसे किया दिल किसी को दिये ॥

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!