आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Prakriti bnam vigyan

मेरे अल्फाज़

प्रकृति बनाम विज्ञान

Bhoopnarayan

5 कविताएं

250 Views
लोगों को खुद के मनुष्य होने का बहुत गुमान था,
 शायद ! पता होता उनको की उसके ऊपर भी,
"प्रकृति" नामक एक भगवान था ।

ज़िन्दगी के सारे सलीकों को भूल कर ,
कर रहा वह मनमानी था।
ऐसे मैं भगवान का कोरोना के रूप में,
लोगों का इम्तहान लेना भी तय ही था।

नसीहतें तो उसके द्वारा भी दी गई थी,
लोगों को तब भी अपने विज्ञान पर अभिमान था।
शायद ! विज्ञान विजय पा सकता था,
पर इंसानों के अपराधों का कर्ज ,
उसके सरेआम था ।

वायरस तो बहुत तुच्छ औऱ सूक्ष्म था,
पर था ग़ालिब इसका असर ,
सबब तो विज्ञान भी जानता था इसका,
की इंसानों ने नहीं छोड़ी कोई कसर ।

इस भयंकर आपदा से अब भाग रहा इंसान था,
शायद ! पता होता उनको कि उसके ऊपर भी,
"प्रकृति " नामक एक भगवान था।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!