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मेरे अल्फाज़

भारत बदल रहा है

Bharti patel

1 कविता

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मेरा भारत बदल रहा है
संस्कृति परिधान और पकवान
कहीं गिर तो कहीं सम्हल रहा है
मेरा भारत बदल रहा है
आधुनिकता की दौड़ है अंधी
जाने किस राह पर चल रहा है
मेरा भारत बदल रहा है
सुविधाओं से सम्पन्न दुनिया
निजीकरण में जकड़ रहा है
मेरा भारत बदल रहा है
शब्द सौंदर्य की बनावट
चहुँ ओर को लुभा रही
बनावटी दुनिआ को भी
हकीकत समझ ढल रहा
मेरा भारत बदल रहा
बेटी की अस्मत का यहाँ मोल नहीं
स्वार्थ पूर्ति में सबका मन मचल रहा
लोग कहते हैं मेरा भारत बदल रहा
शहरों में हजारो इमारतें
पर घर तो अभी भी गावों में बसा
ये कैसा बदलाव हैं जाने
जहा मानवता भी गिर सम्हल रहा है
हाँ मेरा भारत बदल रहा
सचाई की कीमत नहीं
झूठ खुलेआम बिकता है
आधुकनिकता की चादर ओढ़े
जहा धर्म भी शर्मिंदा है
एक वर्ग आज भी गरीबी की आग में जल रहा
सच ही हैं
मेरा भारत बदल रहा......

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