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मेरे अल्फाज़

पाखंड

bhagawati vyas

120 कविताएं

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भाव जगाना हमको आता,
रंग जमाने में क्या जाता!
हाथ हमारे भले कुछ नही,
शरणागत वह सब पा जाता !!

पढ़े लिखे हैं चाहे थोड़े ,
दौड़ा करते अपने घोड़े!
यहाँ धर्म की बिछा बिसाते,
स्वाद जीत का पाया जाता!!

मूल मंत्र हमने यह जाना,
लोगों को कैसे भरमाना !
गुरुता का जब पाठ पढ़ाओ ,
हाथ खजाना ही आ जाता !!

प्रभु की राह नहीं पहचानी ,
गढ़ने लागे नई कहानी !
सम्मोहन नज़रों से बांधा ,
दुनिया को पीछे पा जाता !!

अपनी दुनिया नई रचाई ,
पाट रहे थे हम तो खाई !
शासन ने दे दी जागीरें ,
नेता भी मुट्ठी आ जाता !!

कनक समान देह चमकाई ,
सुरा , सुंदरी जगह जो पाई !
भीड़ बड़ी भक्तों की जैसे ,
समय द्वार पर ठहरा जाता !!

एक दिन फन्दा आगे आया ,
पछतावे का समय न पाया !
सच्चाई हम जान गये थे ,
हाथों से सब छूटा जाता !!

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