बेवफ़ाई

                
                                                             
                            हम तो ख़ुद में जीते हैं, उन्हें ये बेअदबी की नुमाईश लगती है,
                                                                     
                            
ये हमें अकेला छोड़ जाने की, उनकी ख़्वाहिश लगती है।
शायद उसने बेवफाई का इरादा कर लिया होगा,
वो ऐसे तो नहीं थे, ये किसी और की समझाईश लगती है।।


हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
1 year ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
X