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मेरे अल्फाज़

रातों को मुझे जगाने आ

basu harbansh

19 कविताएं

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रातों को मुझे जगाने आ,
कुछ पल मेरे संग बिताने आ,

तेरी यादों से मैं भरा हूं,
कुछ भूला हूं तो याद दिलाने आ,

मुझसे हुई हो कोई ख़ता तो,
मुझको तू बताने आ,

कोई नाराज़गी हो मुझसे तो,
मुझको तू जताने आ,

तेरे बिन उजड़ा हुआ हैं मेरा जहां,
इनको तू सजाने,

ये तन्हाई जो मुझपे हंसती हैं,
इनको तू रुलाने आ,

मुझसे कर के कोई दिल्लगी,
मुझको फिर हंसाने आ,

यहां कोई नहीं मुझको तंग करने को,
मुझको तू सताने आ,

कोई वादा नहीं,
फिर भी निभाने आ,

मेरे प्यार पर यक़ीन कर या न कर,
बस यूं ही मुझे आजमाने आ,

न कोई रिश्ता है न कोई नाता है,
मुझको तू अपना बनाने आ,

बहुत सह चुका दर्द जुदाई का,
इनको तू दफ़नाने आ।


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