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मेरे अल्फाज़

रात भर न सोई बुनती रही सपने हजार

basu harbansh

21 कविताएं

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रात भर न सोई बुनती रही सपने हजार,
मखमली चादर पे लेटे करती रही पिया का इंतजार,

चांद की रौशनी में चांदनी का होता रहा दीदार,
बैठे रहे तकिये पे डालें बाहों का हार,

बुझी हुई थीं अंगीठी, तन को छूती रही सर्द हवाओं का फ़ुहार
रुक रुककर आंखों से बहती रही धार,

रातभर मुझको घुरती रही ये दरो-ओ-दीवार,
रात का सन्नाटा छेड़े मन का तार,

सुना हैं घर, सुना है मेरा संसार,
तरस रही पाने पिया का प्यार,

मानूंगी न कभी इस विरह से हार,
कभी तो खत्म होगी पिया का इंतज़ार।


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