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मेरे अल्फाज़

मेरी नन्हीं सी गुड़िया

basu harbansh

16 कविताएं

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मेरी नन्हीं सी गुड़िया जादू की पुड़िया,
माथे पे काजल की बिंदिया,
हाथों में सजाए वह कांच की चूड़ियां,
तुतला के सबसे जब वो करती है बतियां,
मीठी बहुत लगती है उसकी बतियां
फूलों की है वो बगिया,
मेरे सुने घर में भर दी वो खुशियां
रातों को जब उसको ना आए निंदिया,
लोरी सुनाऊं मैं आ जा रे निंदिया,
मेरी गोदी में सो कर वो सजाए सपनों की दुनिया,
उसको तकते बीत जाए सारी रतिया,
मेरी नन्हीं सी गुड़िया जादू की पुड़िया
कितनी जल्दी बड़ी हो जाती है गुड़िया,
मेरी हाथों को पकड़कर चलती थी जो गुड़िया,
आज मेरा सहारा बनती हैं मेरी गुड़िया,
ज़रा सी बात पे जो घबरा जाती थी मेरी गुड़िया,
आज मेरे लिए सबसे लड़ जाती है मेरी गुड़िया,
कौन कहता है छोड़ बाबुल का घर चली जाती है गुड़िया,
अपना दिल यहीं छोड़ जाती है गुड़िया,
बस एक बार याद कर लो दौड़ी चली आती है गुड़िया।

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