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मेरे अल्फाज़

मैंने जब भी तुझको रुलाया है

basu harbansh

16 कविताएं

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मैंने जब भी तुझको रुलाया है,
मैंने भी अपनी पलकों को भिगाया है,

जो दर्द तुझको मिला है मेरा ही वो एक हिस्सा है,
तुझे देकर दर्द मैंने तुझसे ज्यादा दर्द पाया है,

तुझे देकर दो पल की तन्हाई,
बरसों की तन्हाई मैंने पाया है,

तू मुझे भूल जाए ये मेरी दुवा है,
मैंने तो अपना हर पल तेरी याद में बिताया है,

मेरी खुशनसीबी की तूने मुझे चाहा है,
मेरी बदनसीबी की मैंने तुझे सताया है,

मेरी दुनिया में कांटे हैं फूल नहीं,
अच्छा है मैंने अपनी चाहत को दिल में ही दबाया है,

तेरी कल की खुशी के लिए हमनें सनम,
आज तेरा दिल दुखया है।

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