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मेरे अल्फाज़

जीवन बस चल रहा

basu harbansh

17 कविताएं

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ना विफल रहा ना सफल रहा,
जीवन बस चल रहा,

हर दिन मैं एक सा ही होता हूं,
नहीं कहीं कुछ बदल रहा,

ख़्याल कैसे करूं मैं गैरो का,
हाल ख़ुद का ना यहां संभल रहा,

रोजमर्रा की भागदौड़ में,
सारा वक़्त निकल रहा,

बचपन से जवानी, जवानी से बुढापा,
आना है ये तो अटल रहा,

इतनी जल्दी कैसे मैं आंखे बंद कर लूं,
अभी भी कुछ ख़्वाब आंखों में पल रहा।


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